संसद किसी शपथपत्र से बाध्य नहीं’–सुप्रीम कोर्ट
‘संसद किसी शपथपत्र से बाध्य नहीं’
–सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि संसद को कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है और वह अदालत के समक्ष दिए गए किसी भी शपथपत्र से बाध्य नहीं होती। अदालत ने कहा कि कार्यपालिका द्वारा दायर शपथपत्र “सुझाव” या “राय” हो सकते हैं, पर वे संसद की विधायी शक्तियों को सीमित नहीं कर सकते।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने यह टिप्पणी उस दौरान की जब भारतीय दंड संहिता की धारा 152 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी। अदालत ने कहा कि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है और न्यायालय के समक्ष दिए गए किसी आश्वासन के आधार पर संसद को रोका नहीं जा सकता।
पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि यदि सरकार अदालत में कोई शपथपत्र देती है, तो वह उस समय की नीति-संबंधी स्थिति को दर्शाता है, लेकिन उससे संसद की संप्रभु विधायी शक्ति पर कोई बंधन नहीं पड़ता। अदालत ने कहा कि कानून की संवैधानिक वैधता का परीक्षण न्यायालय करेगा, पर विधायी प्रक्रिया में दखल सीमित दायरे में ही संभव है।
मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।