फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट रोकने की नई व्यवस्था पर 45 दिन में निर्णय के निर्देशजयपुर

vasudev vyas

Written by

vasudev vyas

फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट रोकने की नई व्यवस्था पर 45 दिन में निर्णय के निर्देश
जयपुर,
राजस्थान हाईकोर्ट ने एसएमएस अस्पताल जैसे मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सकों के नाम पर जारी हो रहे नकली मेडिकल प्रमाण पत्रों को लेकर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ डॉक्टरों के नाम से फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाए जाने और जारी होने को रोकने के लिए फिलहाल कोई प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे चिकित्सा प्रमाण पत्रों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जारी करने की व्यवस्था से जुड़ी लंबित फाइल पर 45 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों से परामर्श कर प्रस्ताव को अंतिम रूप देने को कहा गया है। साथ ही अदालत ने इस संबंध में तैयार किए गए एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के ड्राफ्ट की प्रति भी पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने शंकुतला द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अविनीत बोहरा ने अदालत को बताया कि प्रमाण पत्रों की जालसाजी और दुरुपयोग रोकने के लिए एसओपी का ड्राफ्ट तैयार कर अनुमोदन के लिए भेज दिया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुराग कल्लाविया ने बताया कि मामला एसएमएस अस्पताल के पास स्थित करीब छह बीघा जमीन से जुड़े विवाद से संबंधित था। सुनवाई के दौरान बीमारी को लेकर एसएमएस अस्पताल की डॉ. भावना शर्मा द्वारा जारी उपचार प्रमाण पत्र कोर्ट में पेश किया गया था।
अदालत ने एसएमएस प्रशासन को डॉ. भावना शर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। डॉक्टर ने प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए अपने खिलाफ जारी आदेश को रद्द करने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु भी हो चुकी है, जिसके बावजूद कोर्ट ने फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्रों पर नियंत्रण के लिए व्यवस्था बनाने के निर्देश जारी किए हैं।

Naya Avatar News से आप यहाँ भी जुड़ें !