बीकानेर स्थापना दिवस पर पतंगबाजी का दौर: सुबह और शाम उड़ रही पतंगे, दोपहर तेज धूप के चलते आसमान है साफ
बीकानेर का 539वां नगर स्थापना दिवस परंपराओं के साथ रविवार को मनाया जाएगा। इस मौके पर शहर में खास तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों में मटकीयों का पूजन किया जाएगा और पारंपरिक रूप से खीचड़ा व इमरती व मिठाई जैसे व्यंजन बनाए जाएंगे। हालांकि अक्षय द्वितीय और अक्षय तृतीया की तारीखों को लेकर असमंजस बना हुआ है।
शहर में स्थापना दिवस पर पारंपरिक ‘चंदा’ उड़ाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। लोग अपने घरों और मोहल्लों में चंदा उड़ाकर शहर की खुशहाली की कामना करेंगे। चंदों पर पारंपरिक दोहे, संदेश और चित्र भी बनाए जा रहे हैं।
दो दिन तक पतंगबाजी का दौर
स्थापना दिवस के मौके पर बीकानेर में दो दिवसीय पतंगबाजी का आयोजन होगा। सुबह से शाम तक आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाएगा। छतों पर युवाओं और बच्चों की भीड़ रहेगी और पतंगों के पेच लड़ाने का रोमांच देखने को मिलेगा। पिछले दो दिन से तेज गर्मी के बावजूद बीकानेरवासी पतंग उड़ाते नजर आए। परकोटे के भीतर बसे शहर में पतंगबाजी से पूरा आसमान पटा रहता है।
बाजारों में बढ़ी रौनक
पतंगबाजी को लेकर बाजारों में पतंग और मांझे की दुकानों पर अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक पतंग-मांझा खरीदते नजर आ रहे हैं। वहीं, खीचड़ा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री जैसे गेहूं, बाजरा, मूंग, घी, चीनी, काली मिर्च, इलायची आदि की खरीदारी भी तेज हो गई है। बाजारों में तैयार खीचड़ा और अन्य सामग्री की बिक्री भी बढ़ी है।
मटकीयों की भी खरीदारी तेज
स्थापना दिवस पर घर-घर मिट्टी की मटकीयों का पूजन किया जाता है। इस परंपरा के चलते बाजारों में मटकी, हांडी, लोटड़ी और कुल्हड़ों की मांग बढ़ गई है। लोग इन मटकीयों में पानी भरकर पूजन करेंगे। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजकर सामूहिक रूप से मटकीयों का पूजन करेंगी और शहर की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
परंपरा और उत्साह का संगम
नगर स्थापना दिवस पर जल संरक्षण, पशु-पक्षी सेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे संदेश भी दिए जाएंगे। यह आयोजन बीकानेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का जीवंत उदाहरण बनेगा।