कैसी जनसुनवाई, कैसा सीएम पोर्टल?— नरेन्द्र सिंह राजावत, बीकानेर
कैसी जनसुनवाई, कैसा सीएम पोर्टल?*
*— नरेन्द्र सिंह राजावत, बीकानेर*
राजस्थान सरकार जनसुनवाई, सीएम पोर्टल और 181 हेल्पलाइन को आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का माध्यम बताती है। समय-समय पर यह दावा भी किया जाता है कि अधिकांश शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कागज़ों में दिखाया गया निस्तारण वास्तव में धरातल पर भी दिखाई देता है?
यदि हाल के समाचारों और आम नागरिकों के अनुभवों पर गौर करें तो अनेक मामलों में शिकायतों का निस्तारण केवल रिकॉर्ड में दिखा दिया जाता है, जबकि वास्तविक समस्या जस की तस बनी रहती है। बीकानेर नगर निगम सहित कई विभागों में ऐसे अनेक परिवाद हैं जो वर्षों से लंबित हैं। शिकायतकर्ता बार-बार गुहार लगाते हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर औपचारिक या तथ्यों से परे जवाब देकर प्रकरणों को बंद कर दिया जाता है।
सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी गलत अथवा भ्रामक रिपोर्ट देकर शिकायत का निस्तारण दर्शाता है, तो उसके विरुद्ध जवाबदेही तय होती हुई दिखाई नहीं देती। जब तक झूठी रिपोर्ट देने वालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनसुनवाई की व्यवस्था पर लोगों का विश्वास मजबूत होना कठिन है।
इतना ही नहीं, यह आरोप भी सामने आते रहे हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजी गई शिकायतों में भी कई बार वास्तविक समाधान के बजाय औपचारिक जवाब प्रस्तुत कर निस्तारण दिखा दिया जाता है। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि पूरी शिकायत निवारण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न है।
प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर अनेक सवाल उठते रहे हैं। हवाला नेटवर्क, स्पा सेंटरों की आड़ में कथित अनैतिक गतिविधियाँ, पीड़ितों की एफआईआर दर्ज होने में कठिनाइयाँ तथा न्याय मिलने में होने वाली लंबी देरी जैसी समस्याएँ आज भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ऐसे में आम नागरिक स्वाभाविक रूप से यह अपेक्षा करता है कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान दे और केवल उपलब्धियों का प्रचार करने के बजाय जमीनी स्तर पर सुधार सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश के सर्वोच्च निर्वाचित राजनीतिक पद पर हैं। उनसे अपेक्षा है कि वे शिकायत निवारण व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा कराएँ, झूठी रिपोर्ट देकर मामलों का निस्तारण दिखाने की प्रवृत्ति पर कठोर कार्रवाई करें तथा यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक शिकायत का समाधान केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि वास्तविकता में भी दिखाई दे।
लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच विश्वास सबसे बड़ी पूँजी है। यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय का अनुभव प्रत्येक नागरिक को होगा। केवल उपलब्धियों का प्रचार या आँकड़ों का प्रदर्शन पर्याप्त नहीं है; वास्तविक जनहित तभी सिद्ध होगा जब आम आदमी की समस्या का निष्पक्ष और प्रभावी समाधान होगा।
जय हिन्द।
