याददाश्त में कमी और मानसिक विकारों की शुरुआती पहचान में जुटी आईआईटी जोधपुर की टीम

vasudev vyas

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याददाश्त में कमी और मानसिक विकारों की शुरुआती पहचान में जुटी आईआईटी जोधपुर की टीम

जोधपुर। आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML) और आधुनिक संगणकीय तकनीकों की मदद से ऐसे शुरुआती संकेतों की पहचान करने में जुटे हैं, जिनसे भविष्य में स्मृति ह्रास (Memory Loss) और मानसिक क्षमताओं में होने वाली गिरावट का पूर्वानुमान लगाया जा सके।
शोध का उद्देश्य बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन कर यह समझना है कि वे स्मृति और मानसिक कार्यक्षमता को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। इससे माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (MCI) और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (FTD) जैसी बीमारियों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान और समय पर उपचार संभव हो सकेगा।
शोधकर्ता वास्तविक जीवन जैसी परिस्थितियों का निर्माण कर उन्नत ब्रेन इमेजिंग तकनीकों के माध्यम से यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि अलग-अलग परिस्थितियों में मानव मस्तिष्क भावनाओं को कैसे नियंत्रित करता है। इस अध्ययन से अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक विकारों की पहचान के लिए नए जैविक संकेतक (Biomarkers) विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
खतरों पर मस्तिष्क की प्रतिक्रिया का भी होगा अध्ययन
आईआईटी जोधपुर की प्रयोगशाला में यह भी शोध किया जा रहा है कि अचानक सामने आने वाले खतरों पर मस्तिष्क किस प्रकार तुरंत प्रतिक्रिया देता है। वैज्ञानिकों ने ऐसे मस्तिष्कीय नेटवर्क और ब्रेन वेव्स की पहचान की है, जो महत्वपूर्ण और गैर-जरूरी संकेतों के बीच अंतर कर ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध ध्यान संबंधी विकारों, विशेष रूप से एडीएचडी (ADHD), के बेहतर उपचार और नई चिकित्सीय संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह अध्ययन भविष्य में न्यूरोलॉजी और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।

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