धैर्य और विनम्रता ही सच्चे नेतृत्व की पहचान -बीकानेर बार एसोसिएशन के कार्यालय सचिव सुखदेव व्यास एडवोकेट का संदेश
धैर्य और विनम्रता ही सच्चे नेतृत्व की पहचान -बीकानेर बार एसोसिएशन के कार्यालय सचिव सुखदेव व्यास एडवोकेट का संदेश
बीकानेर।
“गुस्से के वक्त थोड़ा रुक जाने से और ग़लती के वक्त थोड़ा झुक जाने से ज़िंदगी खुशनुमा एवं आसान हो जाती है।” यह विचार केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वर्तमान राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। बीकानेर के प्रबुद्ध अधिवक्ताओं और बीकानेर बार एसोशिएशन के कार्यालय सचिव सुखदेव व्यास के अनुसार, यदि इस नीति को शासन और राजनीति में पूरी ईमानदारी से अपनाया जाए, तो देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को एक नई दिशा मिल सकती है।
सुखदेव व्यास ने जोर देकर कहा कि यदि राजनीतिक दल और शासक वर्ग व्यक्तिगत जीवन की तरह ही शासन संचालन में भी संयम और नम्रता को स्थान दें, तो आपस में संवाद का दायरा बढ़ेगा। जब किसी मुद्दे पर जनहित में फैसले लेने हों, तो अहंकार को दरकिनार करना ही बुद्धिमत्ता है। इससे बेवजह के राजनीतिक टकराव कम होंगे और जनहित के निर्णय अधिक प्रभावी ढंग से लागू हो सकेंगे।
अधिवक्ताओं का मानना है कि देशहित और राष्ट्रहित के सामने व्यक्तिगत या दलीय अहंकार का कोई मूल्य नहीं होना चाहिए। समय आने पर धैर्य रखना, आत्ममंथन करना और यदि कोई भूल हुई हो तो उसमें आवश्यक सुधार का साहस दिखाना ही सच्चे और परिपक्व नेतृत्व की पहचान है।
लोकतंत्र में असहमति और विरोध को एक स्वस्थ प्रतीक माना गया है। लेकिन असहमति के साथ-साथ समय पर संयम बरतना और आवश्यकता पड़ने पर अपनी भूल स्वीकार कर सही राह चुनना ही राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का असली प्रमाण है।
अधिवक्ता सुखदेव का मानना है कि यदि देश की राजनीति में यह ‘धैर्य और स्वीकार्यता’ का भाव समाहित हो जाए, तो कई जटिल समस्याओं का समाधान बहुत ही शांतिपूर्ण और जन-हितैषी ढंग से निकाला जा सकता है।

