साइबर ठगी पर राजस्थान पुलिस का बड़ा फैसला, अब स्वत: दर्ज होगी ई-जीरो एफआईआर
साइबर ठगी पर राजस्थान पुलिस का बड़ा फैसला, अब स्वत: दर्ज होगी ई-जीरो एफआईआर
जयपुर। राजस्थान में साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राजस्थान पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर अब एक लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज होते ही स्वतः ई-जीरो एफआईआर दर्ज की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य साइबर ठगी के पीड़ितों को त्वरित राहत और समयबद्ध कार्रवाई उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और सीसीटीएनएस प्रणाली का एकीकरण किया गया है। शिकायत मिलते ही संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन में स्वतः ई-जीरो एफआईआर दर्ज होगी, जिसके बाद बिना शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर की प्रतीक्षा किए पुलिस बैंक खातों को फ्रीज कराने, संदिग्ध राशि होल्ड कराने तथा सीडीआर, आईपीडीआर और सीसीटीवी फुटेज जैसे डिजिटल साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई तुरंत शुरू कर सकेगी।
पुलिस के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के 72 घंटे के भीतर पीड़ित को संबंधित थाने में जाकर मुद्रित प्रति पर हस्ताक्षर करने होंगे। यदि निर्धारित समय में हस्ताक्षर नहीं किए जाते हैं तो नोटिस जारी किया जाएगा, लेकिन प्रारंभिक जांच प्रभावित नहीं होगी।
जांच के लिए कार्यक्षेत्र भी निर्धारित किया गया है। एक करोड़ रुपये या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की जांच राज्य स्तरीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर करेगा, जबकि एक लाख से एक करोड़ रुपये तक के मामलों की जांच संबंधित जिला साइबर पुलिस थाना अथवा स्थानीय पुलिस थाना करेगा।
राजस्थान पुलिस का मानना है कि इस तकनीक आधारित व्यवस्था से साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव होगी और पीड़ितों को शीघ्र कानूनी सहायता मिल सकेगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देरी किए हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
