चीनी की कीमतों में 19% तक गिरावट, फिर भी ग्राहकों को राहत नहीं, बिचौलियों पर उठे सवाल
चीनी की कीमतों में 19% तक गिरावट, फिर भी ग्राहकों को राहत नहीं, बिचौलियों पर उठे सवाल
सहकारी चीनी मिलों के महासंघ का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और फैक्ट्री गेट पर कीमतों में गिरावट के बावजूद उपभोक्ताओं को उसका लाभ नहीं मिलने का कारण बिचौलिए हैं। ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज’ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने यहां एक कार्यक्रम से इतर समाचार एजेंसी ‘यूनीवार्ता’ के प्रश्न के उत्तर में यह बात कही। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में 18-19 प्रतिशत की गिरावट आई है। अब फैक्ट्री गेट पर (मिल जिस दर पर बिक्री करते हैं) चीनी की कीमत 45-46 रुपए प्रति किलोग्राम है।
यह पूछे जाने कि उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत अभी 62 रुपए और थोक कीमत 58 रुपए प्रति किलोग्राम है, पाटिल ने कहा, “मिल से 45-46 रुपए बिकने वाली चीनी पर परिवहन और दूसरे खर्च मिलाकर उपभोक्ताओं को यह चीनी 50 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास मिलनी चाहिए। यदि बाजार में दाम इससे अधिक हैं तो निश्चित रूप से इसके पीछे बिचौलियों का हाथ है।” ग्रीन एनर्जी सेमीनार में हिस्सा लेने के लिए यहां आए श्री पाटिल ने एथेनॉल को सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन का बचाव करते हुए कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है, इसकी किल्लत पैदा की गई थी।
एक तरफ चीनी मिलों के संगठन दाम बढ़ने के लिए बिचौलियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार की जांच में कुछ चीनी मिलों में घोषित स्टॉक से ज्यादा चीनी रखने का पता चला था। सरकार ने भी 28 अगस्त को दावा किया था कि देश में चीनी की कमी नहीं है।
