फलोदी मामले के बाद मानवाधिकार आयोग की सख्ती, पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों को दिए आचरण सुधारने के निर्देश

vasudev vyas

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फलोदी मामले के बाद मानवाधिकार आयोग की सख्ती, पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों को दिए आचरण सुधारने के निर्देश

जयपुर/बीकानेर। राजस्थान पुलिस महकमे में लंबे समय से चली आ रही कथित ‘बॉस कल्चर’ और अधिकारियों के कड़े व्यवहार को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फरियादियों के साथ-साथ अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के प्रति भी शालीन, विनम्र और संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करें। हालिया रिपोर्टों में भी पुलिस मुख्यालय के इन दिशा-निर्देशों की पुष्टि हुई है।
दरअसल, फलोदी जिले से जुड़े एक मामले में अधीनस्थ पुलिसकर्मियों ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के व्यवहार और कथित कठोर भाषा को लेकर मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। शिकायत में अधिकारियों के व्यवहार से पुलिसकर्मियों में असंतोष और मनोबल प्रभावित होने की बात सामने आई थी।
मानवाधिकार आयोग ने दिखाई सख्ती
राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि संविधान के मूल कर्तव्य और सेवा आचरण नियम किसी भी अधिकारी को रूखे एवं कठोर व्यवहार की अनुमति नहीं देते।
आयोग ने डीजीपी और कार्मिक विभाग को निर्देश दिए कि पूरे पुलिस बल में ऐसा आचरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे पुलिसकर्मियों का मनोबल न गिरे। आयोग के निर्देशों के अनुपालन में पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के पुलिस अधिकारियों को अपने व्यवहार और कार्यशैली में सुधार की नसीहत दी है।
अधिकारियों को दिया गया स्पष्ट संदेश
पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि थाने या कार्यालय में आने वाला आम नागरिक पहले से ही किसी मानसिक परेशानी या समस्या से जूझ रहा होता है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों का व्यवहार सकारात्मक, गरिमापूर्ण और संवेदनशील होना चाहिए। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ भी मानवीय व्यवहार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
फलोदी प्रकरण के बाद मानवाधिकार आयोग की सख्ती ने पुलिस महकमे में अधिकारियों के व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना
असर दिखाई देता है

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