उर्जा मंत्री के क्षेत्र में ही बुनियादी ढांचा जर्जर
उर्जा मंत्री के क्षेत्र में ही बुनियादी ढांचा जर्जर
कोटा में निरीक्षण के दौरान ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने निजी कंपनी के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “मुझे शर्म आती है कि मैं ऊर्जा मंत्री हूँ और मेरे क्षेत्र में ही निजी कंपनी ने विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत खराब कर रखी है।” उन्होंने खुलासा किया कि 10 साल पहले सौंपा गया बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के कुप्रबंधन के कारण बर्बादी के कगार पर पहुँच चुका है। कुल 38 जीएसएस (GSS) जर्जर हालत में हैं, परिसरों में झाड़-झंखाड़ उगे हैं और भवनों का रखरखाव तक नहीं किया गया है।
ऊर्जा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रांसफार्मरों पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं और न ही नियमित सेफ्टी ऑडिट कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं पर गलत वीसीआर (VCR) भरने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी को नोटिस जारी किया जा चुका है और सरकार स्तर पर कार्रवाई विचाराधीन है।
गौरतलब है कि राजस्थान के तीन प्रमुख शहरों—कोटा (KEDL), बीकानेर (BKESL) और भरतपुर (BESL)—में बिजली वितरण का जिम्मा एक ही मातृ कंपनी सीईएससी (CESC / RPSG Group) की सहायक फ्रेंचाइजी कंपनियों के पास है। कोटा में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और खुद ऊर्जा मंत्री की नाराजगी के बाद अब बीकानेर और भरतपुर के उपभोक्ताओं तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी मांग उठाई जा रही है कि तीनों शहरों में कार्यरत इन फ्रेंचाइजी कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर, वीसीआर प्रक्रिया और वित्तीय ऑडिट की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
उपभोक्ताओं का कहना है कि जब ऊर्जा मंत्री के अपने गृह क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटेनेंस की यह स्थिति है, तो बीकानेर और भरतपुर में भी स्थिति अलग नहीं है। ऐसे में सरकार को तत्काल संज्ञान लेते हुए तीनों शहरों में फ्रेंचाइजी अनुबंधों की समीक्षा करनी चाहिए और लापरवाही बरतने वाली निजी कंपनियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाने चाहिए।
