वार्ड नं. 29 (विश्वकर्मा कॉलोनी) में नारकीय हालात, सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त; नगर निगम के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश
नगर निगम प्रशासन की संवेदनहीनता और घोर लापरवाही के चलते वार्ड संख्या 29 स्थित विश्वकर्मा कॉलोनी आज बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। चरमराई सफाई व्यवस्था, सड़कों पर बजबजाती गंदगी, खुले पड़े जानलेवा सीवर चैंबर और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों से त्रस्त कॉलोनीवासियों का धैर्य आज जवाब दे गया। स्थानीय नागरिकों ने एक आपात बैठक कर निगम प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए 10 दिन का कड़ा अल्टीमेटम थमाया है।

बैठक को संबोधित करते हुए जनप्रतिनिधि निर्मल बिश्नोई एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रमुख समस्याओं को रेखांकित किया:
- ‘कूड़े वाली कॉलोनी’ का दंश और महामारी की आहट: वार्ड में पिछले दो महीने से डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाली ऑटो टिपर गाड़ियां पूरी तरह बंद हैं। घरों के बाहर कट्टों में कचरा सड़ रहा है और गलियां डंपिंग यार्ड बन चुकी हैं। बारिश के चलते स्थिति बदतर हो गई है और पूरे क्षेत्र में संक्रामक रोग व महामारी फैलने का खतरा सिर पर मंडरा रहा है।
- सीवरेज के खुले ढक्कन — हादसों को खुला निमंत्रण: सीवर लाइन के ढक्कन बीते तीन महीने से टूटे पड़े हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और कीचड़ का अंबार लगा है। इन खुले गड्ढों में पूर्व में भी दुर्घटना हो चुकी है। संबंधित संवेदक और सीवरेज कंपनी को दो महीने पूर्व लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई सुध नहीं ली गई।
- पवित्र नवरात्र पर्व पर भी नहीं पसीजी निगम की आंखें: शारदीय नवरात्र एवं माताजी मंदिर में धार्मिक जागरण के पावन अवसर पर भी निगम ने अतिरिक्त जेसीबी, डंपर या सफाईकर्मियों की व्यवस्था नहीं की। केवल झूठे वादों के सहारे श्रद्धालुओं और आमजन की भावनाओं की अनदेखी की गई।
- कर्मियों की भारी कमी और अंधेरे में डूबी गलियां: इतने बड़े क्षेत्रफल वाले वार्ड में महज 10 से 12 कर्मचारी तैनात हैं, जिन्हें तत्काल बढ़ाकर कम से कम 20 किया जाए। साथ ही क्षेत्र की 25 प्रतिशत से अधिक रोड लाइटें लंबे समय से ठप पड़ी हैं, जिससे रात के समय असामाजिक तत्वों और दुर्घटनाओं का भय बना रहता है।