फर्जी डिग्रियों के सहारे डॉक्टर बना, अस्पताल खरीदकर खुद करने लगा ऑपरेशन!

vasudev vyas

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फर्जी डिग्रियों के सहारे डॉक्टर बना, अस्पताल खरीदकर खुद करने लगा ऑपरेशन!
राजस्थान में फर्जी मेडिकल डिग्री और पंजीयन गिरोह का एसओजी ने किया खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार
जयपुर, 16 अक्टूबर। राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर बनने और मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने वाले गिरोह का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने खुलासा किया है। हैरान करने वाली बात यह है कि गिरोह का एक आरोपी आठवीं पास होने के बावजूद कथित फर्जी डिग्रियों के सहारे स्त्री रोग विशेषज्ञ बन गया और अस्पताल खरीदकर खुद ऑपरेशन करने लगा। एसओजी ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि सात अन्य लोगों को नामजद किया गया है।
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में जालोर जिले के रानीवाड़ा निवासी नानजी राम चौधरी (45) और सीकर जिले के थोई खंडेला निवासी पंकज यादव (40) शामिल हैं। नानजी राम को रानीवाड़ा से, जबकि पंकज यादव को हरियाणा के कैथल से पकड़ा गया।
आठवीं पास होकर बना स्त्री रोग विशेषज्ञ
जांच में सामने आया कि नानजी राम चौधरी ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दसवीं और बारहवीं की अंकतालिकाएं, कानपुर की राम विश्वविद्यालय की एमबीबीएस डिग्री तथा मुंबई के एक कॉलेज के नाम से गायनेकोलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स में डिप्लोमा संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए। सत्यापन के दौरान डिप्लोमा प्रमाणपत्र, आवंटन पत्र, अंकतालिकाएं, पासिंग और अटेम्प्ट सर्टिफिकेट सहित कई दस्तावेज फर्जी पाए गए।
आरोप है कि इन दस्तावेजों के सहारे उसने मेडिकल क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2010 में वह निजी क्लीनिक में ओपीडी की पर्चियां काटता था। इसके बाद रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर काम किया और वर्ष 2014 में राजदेव अस्पताल में काउंटर संभाला। वर्ष 2015 में अस्पताल खरीदा तथा 2016 में उसका नाम भास्कर अस्पताल रखा। बाद में वर्ष 2019 में उसे स्त्री रोग विशेषज्ञ नियुक्त किया गया और वह कथित तौर पर खुद भी ऑपरेशन करने लगा। अस्पताल को 100 बेड का बनाने की बात भी जांच में सामने आई है।
दूसरे आरोपी ने भी फर्जी डिग्री का लिया सहारा
एसओजी के अनुसार पंकज यादव ने वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई की थी, लेकिन वह फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (एफएमजीई) में करीब छह बार असफल रहा। इसके बाद उसने कथित तौर पर बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर की फर्जी एमबीबीएस डिग्री, अंकतालिका और बिहार मेडिकल काउंसिल का पंजीयन प्रमाणपत्र बनवाया। इन दस्तावेजों के सत्यापन में भी गड़बड़ी सामने आई।
मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच
मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधारी गोपाल की शिकायत पर 14 अक्टूबर को अशोक नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। एसओजी अब कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पंजीयन प्रक्रिया में उनकी भूमिका और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जांच कर रही है।
मरीजों की जान से खिलवाड़ का गंभीर मामला
यह मामला निजी चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की योग्यता और डिग्रियों के सत्यापन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि बिना वैध चिकित्सा योग्यता के कोई व्यक्ति मरीजों का उपचार और ऑपरेशन करता है, तो इससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित अस्पतालों, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल काउंसिल में पंजीयन की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन और अस्पताल संचालन कथित तौर पर इतने वर्षों तक कैसे चलता रहा तथा संबंधित स्तरों पर सत्यापन में चूक क्यों हुई? एसओजी की जांच में इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।

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