अपनी दुर्दशा पर रोता बीकानेर का विश्वविख्यात धरोहर स्थलराज रतन बिहारी मंदिर एवं ऐतिहासिक पार्क उपेक्षा और अतिक्रमण की भेंट चढ़ा

vasudev vyas

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अपनी दुर्दशा पर रोता बीकानेर का विश्वविख्यात धरोहर स्थल
राज रतन बिहारी मंदिर एवं ऐतिहासिक पार्क उपेक्षा और अतिक्रमण की भेंट चढ़ा
बीकानेर।
बीकानेर की पहचान माने जाने वाले, देश–विदेश के लाखों पर्यटकों को आकर्षित करने वाले ऐतिहासिक राज रतन बिहारी मंदिर और उससे जुड़े विशाल पार्क की हालत आज अत्यंत दयनीय हो चुकी है। दशकों पूर्व बीकानेर राजघराने द्वारा डलमेरा के लाल पत्थर, बेशकीमती सफेद संगमरमर और विदेशी ऐतिहासिक अष्टधातु से निर्मित यह भव्य धरोहर आज चोरों, कबाड़ियों और अतिक्रमणकारियों की भेंट चढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार इंग्लैंड की तर्ज पर निर्मित लगभग 35 फीट ऊंची और 8 फीट चौड़ी अष्टधातु संरचनाएं, पार्क की तीनों दिशाओं में लगी अष्टधातु की नक्काशीदार भारी जालियां (करीब एक सैकड़ा), जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत चोरी हो चुकी हैं। मुख्य गेट के दोनों ओर लगे सफेद संगमरमर के शेर भी गायब हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद अब तक नहीं टूटी।
उल्लेखनीय है कि इस हेरिटेज मंदिर को पुरातत्व विभाग का संरक्षण प्राप्त है। आज़ादी के बाद जब राजपरिवार ने यह निजी मंदिर भारत सरकार को सौंपा था, तब हुए एमओयू (केंद्र सरकार के गजट में दर्ज) की एक प्रमुख शर्त थी कि मंदिर के भीतर और आसपास की भूमि का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों, जागरण, मेले, सामाजिक आयोजनों, रामलीलाओं, खेलकूद और सनातन धर्म से जुड़े कार्यक्रमों के लिए ही किया जाएगा।
देवस्थान विभाग पर गंभीर आरोप
पिछले करीब 15 वर्षों से देवस्थान विभाग इस धरोहर की देखरेख कर रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग पूरी तरह सोया हुआ है। लम्बे संघर्ष के बाद असामाजिक तत्वों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यहां पुलिस चौकी तो शुरू करवाई गई, लेकिन वह भी लगभग बंद पड़ी रहती है।
मंदिर के मुख्य द्वार पर व्यापारियों के होर्डिंग, दोनों ओर दुकानें, प्रवेश करते ही दो दर्जन से अधिक ठेले और गाड़ियां, तथा मंदिर के निचले हिस्से में बनी करीब तीन दर्जन कोठरियों पर अवैध कब्जे—इन सबने मंदिर परिसर को बाजार में तब्दील कर दिया है।
खुले मैदान को बना दिया पार्किंग
सबसे गंभीर मामला मंदिर के पीछे स्थित विशाल खुले मैदान का है, जिसे कभी वृद्धजनों के भ्रमण पथ, बच्चों के खेल मैदान, धार्मिक आयोजनों, संत–महात्माओं के प्रवचन और रामलीलाओं के लिए उपयोग किया जाता था। आरोप है कि देवस्थान आयुक्त ने जिला कलेक्टर के दबाव में, पार्क के सामने की ईएम रोड और आसपास की व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लाभ पहुंचाने के लिए इस ऐतिहासिक मैदान को कार पार्किंग में बदल दिया—वह भी बिना किसी स्पष्ट नियम या अनुमति के।
प्रधानमंत्री को ज्ञापन
ऐतिहासिक इमारतों व धार्मिक स्थलों बचाओ संघर्ष टास्क फोर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस पूरे मामले में फोटोग्राफ सहित प्रधानमंत्री, संस्कृति मंत्री सहित अन्य को स्पीड पोस्ट से ज्ञापन भेजा है। वहीं राज रतन बिहारी मंदिर एवं सम्पूर्ण पार्क अस्तित्व बचाओ संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष कैप्टन डॉ. दिनेश सिंह भदौरिया ने भी आज प्रधानमंत्री से इस धरोहर की ऐतिहासिकता और अस्तित्व को बचाने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो बीकानेर की यह विश्वविख्यात धरोहर केवल इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।

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