न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस और दीर्घकालिक सुधार जरूरी –सीजेआई चंद्रचूड़

vasudev vyas

Written by

vasudev vyas

न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस और दीर्घकालिक सुधार जरूरी —
सीजेआई चंद्रचूड़

नई दिल्ली, Dhananjaya Y. Chandrachud ने रविवार को न्यायपालिका में अधिक संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बार के सदस्यों को वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए। उनका कहना था कि न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस और दीर्घकालिक सुधार जरूरी हैं।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम को न्यायाधीश पद के लिए बार की महिला सदस्यों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इसे अपवाद नहीं बल्कि एक नियम के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बार के सदस्यों को यह साधारण सी वास्तविकता स्वीकार करनी चाहिए कि महिला अधिवक्ता किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहीं, बल्कि निष्पक्ष और उचित प्रतिनिधित्व चाहती हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से न्याय प्रणाली अधिक समावेशी और संवेदनशील बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं होगा, बल्कि धीरे-धीरे एक सतत प्रक्रिया के रूप में सामने आएगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी एक व्यक्ति को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय और देश के उच्च न्यायालयों में चयन प्रक्रिया के दौरान समावेशिता और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जाए।

Naya Avatar News से आप यहाँ भी जुड़ें !