मुफ्त सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, कहा—अंधाधुंध घोषणाएं अर्थव्यवस्था के लिए घातक

vasudev vyas

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मुफ्त सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, कहा—अंधाधुंध घोषणाएं अर्थव्यवस्था के लिए घातक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्यों में बढ़ती मुफ्त सुविधाएं बांटने की नीति पर कड़ी नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस आर्थिक आकलन के मुफ्त योजनाओं की घोषणा करना देश के आर्थिक विकास के लिए बाधा बन सकता है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकांश राज्य पहले से ही वित्तीय घाटे से जूझ रहे हैं, इसके बावजूद विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के बजाय मुफ्त सुविधाएं बांटने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। अदालत ने कहा कि जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और भुगतान करने में असमर्थ हैं, उन्हें लक्षित सहायता देना समझ में आता है, लेकिन अमीर और गरीब में भेद किए बिना सभी को मुफ्त सुविधाएं देना उचित नीति नहीं है।
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि “सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली” जैसी योजनाएं बिना पात्रता के जारी रहीं, तो इससे लोगों में काम करने की प्रेरणा प्रभावित हो सकती है। अदालत ने राज्यों को सलाह दी कि वे लोक-लुभावन घोषणाओं के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और बुनियादी विकास पर ध्यान केंद्रित करें।
शीर्ष अदालत की इन टिप्पणियों को राज्यों की वित्तीय अनुशासन और जिम्मेदार नीति-निर्माण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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