मोहता चौक स्थित मरुनायक तथा मदन मोहन जी मंदिर में जीवंत है प्राचीन भागवत कथा वाचन की परंपरा
मोहता चौक स्थित मरुनायक तथा मदन मोहन जी मंदिर में जीवंत है प्राचीन भागवत कथा वाचन की परंपरा
बीकानेर। धर्मनगरी बीकानेर के प्राचीन मंदिरों में मरुनायक मंदिर और मोहता चौक स्थित मदन मोहन जी का मंदिर अपनी धार्मिक परंपराओं के लिए विशेष पहचान रखते हैं। इस मंदिर में वर्षों से चली आ रही श्रीमद्भागवत कथा वाचन की परंपरा आज भी निरंतर जारी है। मंदिर में प्रतिदिन तीन समय श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया जाता है, जिसमें अनेक श्रद्धालु नियमित रूप से भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त करते हैं।
मंदिर में रतानी व्यास की गद्दी पर कथा वाचन की परंपरा विशेष महत्व रखती है। यहां प्रतिदिन प्रातः 4:30 बजे मंगला आरती के बाद श्रीमद्भागवत कथा का वाचन शुरू होता है। इसके बाद भगवान के श्रृंगार एवं भोग के पश्चात भी कथा होती है। वहीं, रात्रि में भगवान के शयन से पूर्व तीसरी बार कथा वाचन किया जाता है। इस प्रकार मंदिर खुलने के दोरान धार्मिक वातावरण बना रहता है।
माहेश्वरी, अग्रवाल और विजयवर्गीय (गांधी) समाज से जुड़ी परंपरा
इस मंदिर की धार्मिक परंपरा केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में भी इसका विशेष महत्व है। माहेश्वरी समाज, अग्रवाल समाज तथा विजयवर्गीय (गांधी) समाज सहित अन्य संबंधित परिवारों में श्रीमद्भागवत कथा अथवा गरुड़ पुराण की कथा का आयोजन होने पर मंदिर के परंपरागत कथावाचक को आमंत्रित किया जाता है। कथावाचक संबंधित परिवारों के यहां पहुंचकर कथा वाचन संपन्न करवाते हैं।
बीकानेर से ग्रामीण क्षेत्रों तक कायम है परंपरा
परंपरामोहता चौक स्थित मरुनायक तथा मदन मोहन जी मंदिर में जीवंत है प्राचीन भागवत कथा वाचन की परंपरा के अनुसार, मंदिर के धार्मिक कार्यक्षेत्र में बीकानेर के साथ नापासर, सिंथल, गजनेर, अक्कासर सहित उपरोक्त जाती के लोग बीकानर भी शामिल बताए जाते हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले संबंधित समाजों के परिवारों में कथा आयोजन की आवश्यकता होने पर मंदिर को सूचना दी जाती है। इसके बाद मंदिर की परंपरा के अनुसार कथावाचक वहां पहुंचकर श्रीमद्भागवत अथवा गरुड़ पुराण का वाचन करते हैं।
डा गोपाल नारायण व्यास के अनुसार, मंदिर में कथा वाचन की यह व्यवस्था प्राचीन परंपराओं और निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित होती आ रही है। कथा वाचन से जुड़े इन पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए व्यवस्था की जाती है।
बीकानेर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत में ऐसे मंदिरों का विशेष योगदान है, जहां पूजा-अर्चना के साथ-साथ प्राचीन धार्मिक परंपराओं का भी निरंतर निर्वहन किया जा रहा है। मोहता चौक स्थित मरुनायक मंदिर तथा मदन मोहन जी मंदिर में नियमित कथा वाचन की परंपरा इसी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
