विधानसभा में शिलालेखों पर नाम लिखने को लेकर हंगामा, अध्यक्ष ने दिए स्पष्ट निर्देश
विधानसभा में शिलालेखों पर नाम लिखने को लेकर हंगामा, अध्यक्ष ने दिए स्पष्ट निर्देश
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को सरकारी भवनों के शिलालेखों (शिलापट्ट) पर नाम लिखने के मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने इस मुद्दे को उठाते हुए “नाथी के बाड़े” का जिक्र करते हुए तंज कसा, जिससे सदन में जोरदार हंगामा हो गया।
सदन में बढ़ते हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने व्यवस्था देते हुए कहा कि सरकारी भवनों के लोकार्पण या उद्घाटन के शिलापट्ट पर केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के ही नाम लिखे जाएंगे, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से हों।
विधायक गौतम ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के समय कई सरकारी भवनों के उद्घाटन शिलालेखों पर जनप्रतिनिधियों के साथ उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी लिखे गए। उन्होंने कहा कि यह परंपरा गलत है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
गौतम ने यह भी सवाल उठाया कि केकड़ी जिला अस्पताल में मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई के भवन का औपचारिक उद्घाटन क्यों नहीं किया गया। इस पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि केकड़ी जिला अस्पताल में मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई का भवन आचार संहिता लागू होने से पहले 30 सितंबर को ही उद्घाटित कर दिया गया था।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग की अनुमति के बिना किसी प्रकार का उद्घाटन नहीं किया गया है, इसलिए किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई विचाराधीन नहीं है।
हालांकि विधायक गौतम ने फिर आरोप लगाया कि कई शिलालेखों पर पिता-पुत्र या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी दर्ज किए गए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पिछली सरकार ने व्यवस्थाओं को “नाथी का बड़ा” बना दिया था।
इस पर मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि जहां भी शिलालेखों पर गलत नाम लिखे गए हैं, उन्हें हटाने का काम सरकार करेगी और इस संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी।