स्थानीय कांग्रेस नेताओं की कथित बेरुखी से नाराजगी की चर्चा, परिणाम बताएगा राजनीतिक असर
स्थानीय कांग्रेस नेताओं की कथित बेरुखी से नाराजगी की चर्चा, परिणाम बताएगा राजनीतिक असर
बीकानेर। पुष्करणा समाज के प्रभावशाली नारायण परिवार को लेकर अब स्थानीय कांग्रेस की राजनीति में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक एवं सामाजिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेता इस परिवार को अपेक्षित महत्व नहीं दे रहे हैं और कथित रूप से परिवार को नजरअंदाज किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि जिस परिवार की शहर के विभिन्न वार्डों में सामाजिक पहुंच रही है और जिसका राजनीतिक जुड़ाव लंबे समय से कांग्रेस से रहा है, उसे चुनावी समय में नजरअंदाज करना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से कितना फायदेमंद रहेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
वार्ड नंबर 57 में नारायण परिवार की पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इस चर्चा ने स्थानीय चुनावी समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है। परिवार से जुड़े एडवोकेट नारायण जी, पूर्व सभापति चतुर्भुज व्यास और आरुण व्यास पूर्व में चुनावी राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव केवल प्रत्याशी के व्यक्तिगत प्रभाव से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक संपर्क, परिवार की स्वीकार्यता और विभिन्न वार्डों में बने नेटवर्क से भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में यदि नारायण परिवार के समर्थकों में किसी प्रकार की नाराजगी पैदा होती है तो उसका असर चुनावी राजनीति पर पड़ सकता है।
हालांकि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की ओर से परिवार को नजरअंदाज किए जाने की चर्चा पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में वास्तव में परिवार को कितना महत्व मिलता है और कथित उपेक्षा का चुनावी असर कितना होता है, इसका फैसला आने वाला समय और चुनाव परिणाम ही करेंगे।
