निकाय चुनाव में पार्टियों के सामने अपने ही कार्यकर्ताओं की चुनौती, बागियों से बिगड़ सकता है गणित
निकाय चुनाव में पार्टियों के सामने अपने ही कार्यकर्ताओं की चुनौती, बागियों से बिगड़ सकता है गणित
बीकानेर। निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच बीकानेर में अंदरखाने राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार प्रमुख राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से ज्यादा अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं की मानी जा रही है। वार्डों के बदले समीकरण के बाद महापौर बनने की उम्मीद लगाए बैठे भाजपा और कांग्रेस के कई नेता अब नए वार्डों की तलाश में जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि कई नेताओं ने दूसरे वार्डों से टिकट के लिए आवेदन फॉर्म भी ले लिए हैं।
टिकट वितरण के बाद यदि प्रमुख दलों से बगावत कर नेता निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरते हैं तो कई वार्डों में सीधा मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दल टिकट वितरण को लेकर बेहद सावधानी बरतने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
वहीं, पूर्व पार्षदों और संभावित निर्दलीय दावेदारों का एक अलग तीसरा मोर्चा भी सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। यह समूह ऐसे वार्डों पर नजर रख रहा है, जहां पिछले चुनाव में जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा था। राजनीतिक जानकारों के अनुसार ऐसे वार्डों में मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी उतरने से अधिकृत उम्मीदवारों के वोटों में सेंध लग सकती है और पूरा चुनावी गणित बदल सकता है।
निवर्तमान पार्षद मनोज विश्नोई का मानना है कि कम अंतर से परिणाम वाले वार्डों में यदि कोई मजबूत बागी प्रत्याशी मैदान में उतरता है तो वह पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के जीत के समीकरण को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा शहर के कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी पहले से ही मजबूत जनाधार रखते हैं, जो चुनाव परिणाम को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
ऐसे में आगामी निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के लिए विपक्षी उम्मीदवारों से मुकाबले के साथ-साथ अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ बनाए रखना सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता नजर आ रहा है। टिकट वितरण के बाद सामने आने वाली तस्वीर ही बताएगी कि कितने दावेदार पार्टी के साथ रहते हैं और कितने बागी बनकर चुनावी मैदान में उतरते हैं।
