पिता चराते हैं भेड़, बेटा लाया 33वीं रैंक: RAS टॉपर बोले- सिलेक्शन प्रोसेस में हिस्सा नहीं लूंगा, पिछले रिजल्ट में आई थी 10वीं रैंक
बीकानेर के कोलायत के रणजीतपुरा निवासी विकास सियाग का लगातार दूसरी बार आरएएस में चयन हुआ है। विकास ने पिछले साल आए परिणाम में जहां 10वीं रैंक हासिल की थी, वहीं शनिवार को आए रिजल्ट में पांचवीं रैंक आई है। विकास इस समय ओटीएस में आरएएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं। उनका कहना है कि वो चयन प्रक्रिया में आगे हिस्सा नहीं लेंगे ताकि दूसरे युवा को अवसर मिल सके।
वहीं RAS परीक्षा 2024 में बीकानेर के कोलायत तहसील में छनेरी गांव के रहने वाले लोकेंद्र सिंह ने 33वीं रैंक हासिल की है। लोकेंद्र की RAS 2023 में 620 रैंक आया था। लेकिन कोई पोस्ट नहीं मिल पाया था। इस बार लोकेंद्र ने 33वीं रैंक हासिल की है। लोकेंद्र ने बताया मैं बीकानेर के एक छोटे से गांव से आता हूं। इतने बड़े पद पर आने वाला गांव का पहला व्यक्ति हूं। गांव में 2 से 3 लोग ही सरकारी नौकरी में है।
पढ़िए विकास और लोकेंद्र की कहानी…

तस्वीर, RAS 2023 के रिजल्ट की है। विकास के 10वीं रैंक लाने की खुशी में उनकी मां ने माला पहना कर स्वागत किया था।
अब चयन में नहीं लेंगे हिस्सा
दैनिक भास्कर को विकास ने बताया कि पिछली बार भी उसका चयन हुआ था, तब प्रदेश में उनकी मेरिट 10वीं मेरिट थी और इस बार 5वीं मेरिट है। जब पांचवीं मेरिट आई तब तक वो दोबारा आरएएस का एग्जाम दे चुके थे। ये गनीमत है कि दोनों ही बार उनका चयन हुआ और मेरिट में भी सुधार हो गया।
विकास ने बताया कि वो इस बार चयन की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे। इससे उनके करियर पर कोई लाभ नहीं है क्योंकि फिर से ट्रेनिंग करनी पड़ेगी। वो दसवीं वरीयता के आधार पर फिलहाल ओटीएस जयपुर में हैं और नेहरु भवन में ट्रेनिंग के अंतिम चरण में है। जल्द ही उन्हें पोस्टिंग भी मिलने वाली है। चयन में हिस्सा नहीं लेकर वो इस साल चयनित युवा को अवसर देना चाहते हैं।
ट्रक ड्राइवर के बेटे हैं विकास
विकास का जब पहली बार चयन हुआ, तब उनके पिता ट्रक ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे। एक सामान्य किसान परिवार से आने वाले विकास का सबसे पहले चयन कनिष्ठ लिपिक के रूप में हुआ था। तब उन्होंने शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूल में ज्वाइन किया। सरकारी नौकरी के साथ ही आरएएस की तैयारी की और सफलता भी प्राप्त की।

पिता भेड़ पालक, जीजा ने पढ़ाया
मेरे पिता भेड़ बकरी पालते हैं। उसी से हमारा घर चलता है। बड़े भाई रणजीत सिंह भी घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण पिता के काम में हाथ बंटाते हैं। उन्होंने मेरी पढ़ाई पूरी करवाने के लिए खुद की पढ़ाई छोड़ दी। मेरे जीजा जी राजेंद्र सिंह आर्मी से रिटायर्ड है।
जब भी मुझे पैसों की आवश्यकता हुई , पूरी फाइनेंशियल मदद उन्होंने की। कोचिंग की फीस की भी व्यवस्था मेरे जीजाजी ने की। पिता भेड़ बकरी बेचकर 3 से 4 महीने में एक ही बार पैसा भेजते थे। ऐसे में कोचिंग करना तो दूर जयपुर में रहकर पढ़ाई करना भी मुश्किल था।