ब्याज दर, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपए का शेयर बाजार पर तिहरा वार, सेंसेक्स ढाई साल के निचले स्तर
ब्याज दर, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपए का शेयर बाजार पर तिहरा वार, सेंसेक्स ढाई साल के निचले स्तर पर
सेंसेक्स 1,045 अंक गिरकर 71,593 पर बंद, निफ्टी भी 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचा
नई दिल्ली। ब्याज दरों में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपए की कमजोरी ने शेयर बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा दिया है। गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,045 अंक यानी 1.44 प्रतिशत टूटकर 71,593 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 371 अंक यानी 1.64 प्रतिशत गिरकर 22,232 के स्तर पर आ गया। निफ्टी का यह स्तर इस साल और पिछले 52 सप्ताह का सबसे निचला स्तर बताया गया है।
सेंसेक्स भी करीब ढाई साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस गिरावट से अप्रैल से अगस्त के बीच हुई रिकवरी लगभग समाप्त हो गई है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के मुताबिक, बाजार में हाल के दिनों में दबाव बढ़ा है और निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।
बाजार पर तीन बड़े झटके
- ब्याज दरों में बढ़ोतरी: रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद इसके 5.50 प्रतिशत होने से कर्ज महंगा होने और खपत प्रभावित होने की आशंका है। इससे कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
- रुपए में कमजोरी: बुधवार को रुपया गिरकर 96.88 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपए से कच्चे तेल, सोना-चांदी और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का खतरा है। इससे महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
- कच्चे तेल में उछाल: पश्चिम एशिया में संघर्ष की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 5.3 प्रतिशत बढ़कर 105.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
रिकॉर्ड स्तर से बड़ी गिरावट
सेंसेक्स ने 13 फरवरी 2024 को करीब 71,555 का स्तर देखा था। इसके बाद 27 सितंबर 2024 को यह 85,978 और 2 जनवरी 2026 को 85,762 तक पहुंचा। 30 मार्च 2026 को सेंसेक्स 71,947 पर था, जबकि 8 अक्टूबर 2026 को यह गिरकर 71,593 पर बंद हुआ। इस तरह रिकॉर्ड स्तर से सेंसेक्स में करीब 14,385 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
अब कंपनियों के नतीजों पर रहेगी नजर
बाजार की अगली दिशा तय करने में जुलाई-सितंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजे अहम भूमिका निभा सकते हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, कंपनियों की मांग, लागत का दबाव और मुनाफे से जुड़े संकेत बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनियां बढ़ती लागत और आर्थिक अनिश्चितता के बीच अपने प्रदर्शन को कितना बेहतर बनाए रख पाती हैं।
