राजस्थान में रोड चेकिंग और सर्वे व्यवस्था में बदलाव, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की पहल
राजस्थान में रोड चेकिंग और सर्वे व्यवस्था में बदलाव, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की पहल
वासुदेव व्यास
मरु समीक्षा न्यूज़ राजस्थान
जयपुर, बीकानेर। राजस्थान के वाणिज्य कर विभाग में रोड चेकिंग और सर्वे की व्यवस्था में बदलाव को व्यापारियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। विभाग की आयुक्त आनंदी द्वारा की गई इस पहल से जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और स्थानीय स्तर पर होने वाली कथित मनमानी पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
पहले जिला स्तर पर रोड चेकिंग, सर्वे और मालवाहक वाहनों की जांच का कार्य संभागीय उपायुक्त प्रशासन के स्तर पर किया जाता था। अब नई व्यवस्था के तहत विभिन्न जोन में सर्वे करवाने तथा रोड चेकिंग के लिए जयपुर मुख्यालय से निर्देश दिए जाने की व्यवस्था की गई है। किस मालवाहक वाहन की जांच की जानी है, इसके लिए भी मुख्यालय स्तर से निर्देश जारी किए जाएंगे।
आयुक्त आनंदी की पहल से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद
वाणिज्य कर विभाग की आयुक्त आनंदी को एक सुलझी हुई और ईमानदार अधिकारी बताते हुए उनके इस निर्णय की सराहना की जा रही है। माना जा रहा है कि मुख्यालय स्तर से निगरानी और निर्देशों के आधार पर जांच प्रक्रिया संचालित होने से स्थानीय स्तर पर मनमानी की संभावनाएं कम होंगी। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इसके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगी।
जर्दा, पान-मसाला और गुटखा कारोबार पर फोकस जरूरी
राजस्थान में जीएसटी राजस्व बढ़ाने के लिए जर्दा, पान-मसाला और गुटखा कारोबार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इन उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री से संबंधित कर नियमों की प्रभावी जांच की जाए तो कर चोरी की संभावनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। इसके लिए नियमों के अनुरूप लक्षित सर्वे, बिलों की जांच और मालवाहक वाहनों की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।
व्यापारियों को राहत और सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद
पुरानी व्यवस्था में सर्वे और वाहन जांच के दौरान मनमानी की शिकायतों से व्यापारियों को परेशानी होने की बात सामने आती रही है। नई व्यवस्था से व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलने तथा जांच प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनने की उम्मीद है।
यदि विभाग निर्धारित नियमों के अनुसार निष्पक्ष जांच करता है और कर चोरी के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई होती है, तो इससे राज्य के जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है। अब देखना होगा कि आयुक्त आनंदी की इस पहल का धरातल पर कितना प्रभाव दिखाई देता है और इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के साथ-साथ राज्य के राजस्व संग्रह में कितना सुधार होता है।
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