राजस्थान में RGHS योजना पर सवाल, निजी अस्पतालों में ब्रांडेड उपकरणों के नाम पर मरीजों से अतिरिक्त वसूली का आरोप
राजस्थान में RGHS योजना पर सवाल, निजी अस्पतालों में ब्रांडेड उपकरणों के नाम पर मरीजों से अतिरिक्त वसूली का आरोप
जयपुर, 12 अक्टूबर। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। निजी अस्पतालों में सर्जरी के दौरान ब्रांडेड उपकरणों के नाम पर मरीजों से अतिरिक्त राशि मांगने और योजना के दायरे से बाहर की दवाइयां लिखने से मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सुत्रो के अनुसार, कुछ निजी अस्पतालों में योजना के पैकेज में शामिल उपकरणों को कम गुणवत्ता वाला बताकर मरीजों के परिजनों से ब्रांडेड उपकरण लगवाने के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगे जाने का आरोप है। सर्जरी से पहले परिजनों को उपकरणों की गुणवत्ता की गारंटी नहीं होने की बात कहकर अधिक कीमत वाले उपकरण चुनने के लिए कहा जाता है। परिजन मरीज की सेहत को प्राथमिकता देते हुए अतिरिक्त भुगतान करने को मजबूर हो जाते हैं।
वहीं, अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ऐसी दवाइयां लिखे जाने की शिकायत भी है, जो योजना के दायरे से बाहर होती हैं। इसके कारण मरीजों को मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं और कैशलेस इलाज का उद्देश्य प्रभावित होता है।
सवाल यह है कि जब योजना के पैकेज में निर्धारित उपकरण शामिल हैं, तो उनकी गुणवत्ता के नाम पर मरीजों से अतिरिक्त राशि किस आधार पर मांगी जा सकती है? यदि उपकरण निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं, तो मरीजों के परिजनों पर अतिरिक्त भुगतान का दबाव क्यों बनाया जाता है?
जरूरत है कि संबंधित विभाग इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच करवाए। निजी अस्पतालों में RGHS के तहत किए जा रहे इलाज, उपकरणों की गुणवत्ता, अतिरिक्त वसूली और योजना से बाहर की दवाइयां लिखने के मामलों की निगरानी की जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हो, ताकि सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिजनों को वास्तविक अर्थों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सके।
