वार्ड चुनाव में वोट सोच-समझकर दें, कहीं आपका वोट गलत हाथों में न चला जाए
वार्ड चुनाव में वोट सोच-समझकर दें, कहीं आपका वोट गलत हाथों में न चला जाए
पार्षद चुनते समय पार्टी और पहचान से पहले देखें उम्मीदवार की छवि—भूमाफिया, दबंग और विवादित चेहरों से जनता रहे सावधान
बीकानेर ।।नगर निगम के वार्ड चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। संभावित उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर जनता के बीच पहुंच बनाने में जुट गए हैं। कोई सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है तो कोई वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय होने का दावा कर रहा है। लेकिन इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता अपने वार्ड की कमान किसके हाथ में सौंपेगी?
पार्षद का चुनाव केवल एक व्यक्ति को पांच साल के लिए कुर्सी सौंपने का चुनाव नहीं है। यह फैसला सीधे तौर पर वार्ड की सड़क, सफाई, नाली, स्ट्रीट लाइट, पार्क, अतिक्रमण और विकास कार्यों को प्रभावित करता है। इसलिए मतदाताओं को उम्मीदवार चुनते समय सिर्फ पार्टी का चुनाव चिन्ह देखकर वोट नहीं डालना चाहिए।
उम्मीदवार की छवि पर उठे सवाल तो जनता जरूर पूछे सवाल
मतदाताओं को यह देखना होगा कि उम्मीदवार की सार्वजनिक छवि कैसी है। क्या वह वास्तव में जनता के बीच रहता है? क्या लोगों की समस्याओं के समय खड़ा होता है? क्या उसके खिलाफ गंभीर विवाद, जमीनों से जुड़े मामले, अवैध कब्जे या दबंगई जैसे आरोप लगातार चर्चा में रहे हैं?
वार्ड का प्रतिनिधि वह होना चाहिए जिसकी पहचान जनसेवा से हो, जमीनों के खेल, दबंगई या विवादों से नहीं।
यदि किसी उम्मीदवार की पहचान ही संदिग्ध गतिविधियों, जमीन-जायदाद के विवादों, अवैध कब्जों या प्रभाव के दम पर काम कराने वाले व्यक्ति के रूप में रही है, तो मतदाताओं को ऐसे चेहरे पर वोट डालने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए। आखिर जिस व्यक्ति को जनता अपने वार्ड की आवाज बनाकर नगर निगम भेजेगी, उससे जवाबदेही और पारदर्शिता की उम्मीद भी की जाएगी।
पांच साल बाद पछताने से बेहतर है चुनाव से पहले सवाल पूछना
अक्सर चुनाव के समय उम्मीदवार जनता के बीच बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनता को अपने पार्षद से मिलने तक के लिए परेशान होना पड़ता है। ऐसे में मतदाताओं को इस बार उम्मीदवार से सवाल पूछने चाहिए—पिछले वर्षों में उसने समाज के लिए क्या किया? क्षेत्र के लिए उसकी क्या योजना है? जनता के बीच उसकी उपलब्धता कितनी है? और उसकी छवि को लेकर जो सवाल उठते हैं, उनका जवाब क्या है?
जनता को किसी भी उम्मीदवार के बारे में अफवाहों पर नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और उसके सार्वजनिक आचरण के आधार पर फैसला करना चाहिए।
पार्टी कोई भी हो, पार्षद साफ छवि वाला होना चाहिए
चुनाव में कांग्रेस हो, भाजपा हो या कोई अन्य राजनीतिक दल—मतदाता का पहला सवाल होना चाहिए कि उम्मीदवार कैसा है?
पार्टी महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन वार्ड की रोजमर्रा की समस्याओं से पार्षद ही सीधे जुड़ा रहता है। इसलिए साफ छवि, ईमानदारी, उपलब्धता, जनसेवा का रिकॉर्ड और वार्ड के विकास की स्पष्ट सोच को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अब फैसला जनता के हाथ में है
बीकानेर के वार्डों के मतदाताओं के पास मौका है कि वे अपने क्षेत्र के लिए ऐसा प्रतिनिधि चुनें जो पांच साल तक जनता के बीच खड़ा रहे, समस्याओं पर आवाज उठाए और नगर निगम में वार्ड की मजबूती से पैरवी करे।
वोट आपका है, वार्ड आपका है और अगले पांच साल भी आपके ही हैं। इसलिए वोट देने से पहले उम्मीदवार की फोटो नहीं, उसके पैसे नहीं,उसकी पूरी छवि देखिए।
क्योंकि गलत पार्षद चुनने का नुकसान केवल एक व्यक्ति को नहीं, पूरे वार्ड को भुगतना पड़ता है।
