शुद्ध प्रदोष पर बन रहा शिव पूजा का शुभ संयोग, भगवान शिव की आराधना से मिलेगा पुण्य लाभ
शुद्ध प्रदोष पर बन रहा शिव पूजा का शुभ संयोग, भगवान शिव की आराधना से मिलेगा पुण्य लाभ
मरु समीक्षा न्यूज़ | धर्म-संस्कृति
बीकानेर। हिंदू धर्म में प्रदोष काल भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने, मंत्र जाप करने और दीपदान करने से भक्तों को सुख-समृद्धि एवं मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व
प्रदोष व्रत प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस विधि से करें पूजा
प्रदोष काल में स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाएं। शिवलिंग पर जल अर्पित करें। श्रद्धानुसार बेलपत्र, पुष्प और धतूरा चढ़ाएं। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें तथा भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति और जनकल्याण की कामना करें। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं।
प्रदोष पूजा के समय का रखें ध्यान
पंचांग के अनुसार, पूजा का शुभ समय स्थान और तिथि के आधार पर निर्धारित होता है। 31 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है, त्रयोदशी नहीं। इसलिए इस दिन को प्रदोष व्रत बताने से पहले तिथि की पुष्टि आवश्यक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की आराधना में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, भक्ति और मन की पवित्रता है।
