किसी कर्मचारी को केवल डिग्री नहीं होने के कारण पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता-सुप्रीमअदालत

vasudev vyas

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नई दिल्ली, 15 अप्रैल — सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि सेवा नियमों में अनुभव, योग्यता या वरिष्ठता के आधार पर छूट का प्रावधान है, तो किसी कर्मचारी को केवल डिग्री नहीं होने के कारण पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक सहकारी समिति के कर्मचारी को प्रमोशन देने से इनकार कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब अन्य कर्मचारियों को समान छूट दी गई है, तो इस मामले में शैक्षणिक योग्यता में रियायत नहीं देना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है।
यह फैसला न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और ए. वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया। अदालत ने कहा, “भेदभाव अन्याय का ही दूसरा नाम है,” और सरकारी नौकरियों में समानता के अधिकार के पालन पर जोर दिया।
मामला एक प्राथमिक कृषि सहकारी समिति के कर्मचारी से जुड़ा था, जिसने लगभग 30 वर्षों तक सेवा दी थी। समिति के निदेशक मंडल ने उसकी लंबी सेवा, वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए उसे “सोसायटी मैनेजर” पद पर पदोन्नत करने की सिफारिश की थी, जिसमें शैक्षणिक योग्यता में छूट देने का भी प्रस्ताव शामिल था।

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