बीकानेर निकाय चुनाव: पहले पार्षद बनने की परीक्षा, फिर महापौर की कुर्सी की जंग
बीकानेर निकाय चुनाव: पहले पार्षद बनने की परीक्षा, फिर महापौर की कुर्सी की जंग
बीकानेर। राज्य सरकार द्वारा महापौर का चुनाव सीधे जनता से कराने के बजाय निर्वाचित पार्षदों के माध्यम से कराने के निर्णय के बाद बीकानेर की राजनीतिक तस्वीर बदल गई है। अब महापौर बनने का सपना देखने वाले कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेताओं को सबसे पहले अपने-अपने वार्ड से पार्षद का चुनाव जीतना होगा।
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों से चुने जाने वाले पार्षद ही महापौर का चुनाव करेंगे। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों में टिकट हासिल करने की होड़ तेज हो गई है। पूर्व महापौर, पूर्व पार्षद, युवा नेता और संगठन से जुड़े कई दावेदार अपने-अपने स्तर पर पार्टी नेतृत्व के समक्ष सक्रिय लॉबिंग में जुटे हैं।
भाजपा प्रदेश और नगर स्तर पर अपनी “डबल इंजन” सरकार की योजनाओं तथा मजबूत संगठन के दम पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस निकाय चुनाव से पहले संगठन की अंदरूनी कलह को समाप्त कर नाराज नेताओं को साथ लाने के प्रयासों में जुटी हुई है, ताकि चुनाव में एकजुट होकर मुकाबला किया जा सके।
राजनीतिक गलियारों में दोनों दलों के कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व महापौरों, जिला पदाधिकारियों और अनुभवी पार्षदों के नाम संभावित महापौर दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन नेता पहले अपने वार्ड से जीत दर्ज कर पार्षद बनता है।
सूत्रों के अनुसार, टिकट वितरण में स्थानीय विधायक, सांसद तथा पार्टी संगठन के वरिष्ठ नेताओं की सहमति सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में निकाय चुनाव में टिकट की दौड़ और वार्ड स्तर की राजनीतिक गतिविधियां आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
