EWS वर्ग को भी मिले राजनीतिक प्रतिनिधित्व, निकाय और पंचायत चुनावों में आरक्षण की उठी मांग
EWS वर्ग को भी मिले राजनीतिक प्रतिनिधित्व, निकाय और पंचायत चुनावों में आरक्षण की उठी मांग
बीकानेर। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों में भी अन्य आरक्षित वर्गों की तरह राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों का कहना है कि जब शिक्षा और सरकारी नौकरियों में EWS को आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है, तो लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई—स्थानीय स्वशासन संस्थाओं—में भी उन्हें प्रतिनिधित्व का अवसर मिलना चाहिए।
मांग करने वालों का कहना है कि नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिका तथा पंचायत चुनावों में ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की तरह EWS वर्ग के लिए भी सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उनका तर्क है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लोगों के लिए बिना आरक्षण के चुनाव लड़ना और जीतना कई बार कठिन होता है, जिससे उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी सीमित रह जाती है।
उन्होंने कहा कि यदि EWS वर्ग के लिए स्थानीय निकायों और पंचायतों में भी उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जाती है, तो लोकतंत्र अधिक समावेशी और संतुलित बनेगा तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की समस्याएं भी प्रभावी ढंग से जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सामने आ सकेंगी।
हालांकि, यह एक नीतिगत और संवैधानिक विषय है, जिस पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार, केंद्र सरकार और न्यायालयों के संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही लिया जा सकता है। फिलहाल इस मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज होने की बात कही जा रही है।
