सीखने की ललक हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती50 वर्ष की आयु में दसवीं उत्तीर्ण कर रचा प्रेरणादायक उदाहरणलूनकरनसर
सीखने की ललक हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती
50 वर्ष की आयु में दसवीं उत्तीर्ण कर रचा प्रेरणादायक उदाहरण
लूनकरनसर | 21 जनवरी
कहा जाता है कि यदि व्यक्ति के हौसलों में उड़ान हो, तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है। सफलता के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती—इसी कथन को साकार कर दिखाया है बीकानेर जिले की लूनकरनसर नगर पालिका निवासी राजेंद्र कुमार चौधरी ने। उन्होंने 50 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षण संस्थान (NIOS) से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण कर समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है।
राजेंद्र कुमार चौधरी ने यह सिद्ध कर दिया कि सीखने और पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। आत्मविश्वास, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम के बल पर हासिल की गई यह उपलब्धि युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
उल्लेखनीय है कि चौधरी अपने पारिवारिक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। वे चार संतानों के पिता हैं—जिनमें ज्येष्ठ पुत्री विवाहित हैं, मंझली पुत्री राजकीय महाविद्यालय, तारानगर (चूरु) में वनस्पति शास्त्र विषय की सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, अनुज पुत्री प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं, जबकि इकलौता पुत्र आईटीआई उत्तीर्ण कर निजी क्षेत्र की कंपनी में सेवाएं दे रहा है।
अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के बाद, उनसे प्रेरणा लेकर राजेंद्र कुमार चौधरी ने स्वयं अध्ययन प्रारंभ किया। उनकी यह सफलता समाज को यह सशक्त संदेश देती है कि सीखने की चाह और संकल्प हो, तो उम्र कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।