छल-कपट बढ़ने पर विरोध करना आवश्यक : – प्रेमानन्द जी महाराज
छल-कपट बढ़ने पर विरोध करना आवश्यक :– प्रेमानन्द जी महाराज
प्रसिद्ध संत प्रेमानन्द जी महाराज ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि जब समाज में छल, कपट और अन्याय अत्यधिक बढ़ जाता है, तब उसका उचित विरोध करना ही सही मार्ग है। उन्होंने कहा कि छल-कपट करने वाला व्यक्ति प्रायः अपनी गलतियों से सीखने के बजाय दूसरों की सहनशीलता को कमजोरी समझ लेता है।
महाराज ने कहा कि कई बार लोग परिवार, समाज या संबंधों की मर्यादा बनाए रखने के लिए किसी की गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका गलत लाभ उठाने वाले लोग इसे अपनी जीत मान लेते हैं। ऐसे व्यक्तियों को यह एहसास नहीं होता कि सामने वाला व्यक्ति शांति और परिवार की एकता के लिए मौन है, बल्कि वे स्वयं को अधिक शक्तिशाली समझने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि अन्याय, छल और कपट को बढ़ावा देने के बजाय समय रहते उसका उचित और मर्यादित विरोध करना चाहिए, ताकि गलत प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाया जा सके। प्रेमानन्द जी महाराज के अनुसार, समाज में सत्य, न्याय और सदाचार की स्थापना के लिए गलत कार्यों का प्रतिकार आवश्यक है तथा ऐसे लोगों को उनके कर्मों का उचित सबक मिलना चाहिए।
