भिखारी-मुक्त शहर के लिए समीक्षा बैठक निर्मूल, राजधानी के ज्यादातर चौराहों पर आज भी भिखारियों की भरमार
भिखारी-मुक्त शहर के लिए समीक्षा बैठक निर्मूल, राजधानी के ज्यादातर चौराहों पर आज भी भिखारियों की भरमार
जयपुर, 3 जनवरी —
जिला प्रशासन और सरकार भिखारी-मुक्त शहर के लिए हर एक-दो माह में समीक्षा बैठक करते आ रहे हैं। जयपुर को भिखारियों से मुक्त कराने के लिए विधानसभा में पिछली सरकार के दौरान प्रस्ताव तक पास हो चुका है।
पिछले साल राइजिंग राजस्थान से ठीक पहले कई भिखारियों को पुनर्वास केंद्र भेजा गया था, लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद राजधानी के ज्यादातर चौराहों पर आज भी भिखारियों की भरमार है। जबकि सरकार यह भली-भांति जानती है कि भिखारियों की संख्या बढ़ना सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
पिछले साल मार्च में जयपुर कलेक्टरेट में शहर में भिक्षावृत्ति उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा नवाचार करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन चिन्हित लोगों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार देने की योजना कागजों तक ही सीमित होकर रह गई।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भिखारियों को जोड़ने के लिए एजेंसियों द्वारा आज तक कोई बैठक नहीं की गई। सरकार की योजनाओं के लिए पात्रता के आधार पर इन्हें बालगृह, महिला गृह, वृद्धाश्रम या पुनर्वास गृह में प्रवेश देने की योजना का भी कोई अता-पता नहीं है।
अपराधिक गतिविधियों में इजाफा भी कर रही हैं। भीख मांगने का नाटक कर मोबाइल फोन और गहने चुराने वाले गिरोह सक्रिय हैं। प्रदेश में एक हिस्ट्रीशीटर की हत्या का आरोपी जयपुर में भिखारी बनकर फरारी काट रहा था।
30 हजार रुपये के इनामी आरोपी ने पुलिस से बचने के लिए अपना सिर भी मुंडवा लिया था। उसे जयपुर में एक मंदिर के बाहर भीख मांगते हुए पुलिस ने दबोचा।
पुलिस की ओर से पिछले काफी समय से भिखारियों की पहचान के लिए कोई अभियान शुरू नहीं हुआ है।