चीनी हुई 60 के पार, रसोई का बजट बिगड़ा: आम जनता का सवाल—कब मिलेगी राहत?विशेष रिपोर्ट वासुदेव व्यास
चीनी हुई 60 के पार, रसोई का बजट बिगड़ा: आम जनता का सवाल—कब मिलेगी राहत?
विशेष रिपोर्ट वासुदेव व्यास
देश में त्योहारों के सीजन से ठीक पहले मिठास की कीमतें कड़वी होने लगी हैं। खुले बाजार में चीनी के दाम ₹60 प्रति किलो के पार पहुंच जाने से आम उपभोक्ता और मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह से डगमगा गया है। लगातार बढ़ते दामों को लेकर जनता में भारी आक्रोश है और लोग सरकार से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
रसोई का बिगड़ा गणित
सुबह की चाय से लेकर दैनिक खान-पान और आने वाले त्योहारों की मिठाइयों तक, चीनी हर घर की बुनियादी जरूरत है। किराना व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं का कहना है कि पिछले कुछ ही हफ्तों में चीनी के थोक और खुदरा दामों में अप्रत्याशित उछाल आया है। ₹60 से ₹65 प्रति किलो तक बिक रही चीनी ने आम आदमी की जेब पर सीधा डाका डाला है।
महंगाई पर वार कब? जब रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं ही पहुंच से बाहर होंगी, तो आम आदमी कैसे गुजारा करेगा?
जमाखोरी पर लगाम क्यों नहीं? बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले सट्टेबाजों और बड़े स्टॉकिस्टों पर कड़ी कार्रवाई कब होगी?
सब्सिडी और राशन में राहत: आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए रियायती दरों पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ठोस कदम कब उठाएगी?
बाजार विशेषज्ञों का क्या कहना है?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पेराई सत्र के अंत में सीमित स्टॉक और आगामी त्योहारी सीजन की मांग के चलते यह तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि, उपभोक्ताओं का तर्क है कि समय रहते स्टॉक सीमा तय न करने और बाजार पर प्रभावी निगरानी न रखने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
आम नागरिकों और उपभोक्ता संगठनों ने सरकार से मांग की है कि चीनी की कीमतों को तत्काल नियंत्रित किया जाए, कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए और आम जनता को महंगाई के इस बोझ से तुरंत राहत दी जाए।
