मुकाम रेस्क्यू वार्ड में स्वस्थ चिंकारा की संदिग्ध मौत; रेंजर पर बिना पोस्टमार्टम शव दफनाने और साक्ष्य मिटाने का आरोप
*मुकाम रेस्क्यू वार्ड में स्वस्थ चिंकारा की संदिग्ध मौत; रेंजर पर बिना पोस्टमार्टम शव दफनाने और साक्ष्य मिटाने का आरोप*
श्रीराम भादू,/बीकानेर
*बीकानेर/नोखा।* वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर राजस्थान का वन विभाग एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। नोखा रेंज के अंतर्गत आने वाले मुकाम रेस्क्यू वार्ड में वन्यजीव प्रेमियों द्वारा सुपुर्द की गई एक पूर्णतः स्वस्थ चिंकारा मादा हिरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि क्षेत्रीय वन अधिकारी (RFO) किशोर सिंह ने मामले को दबाने के लिए उच्चाधिकारियों को बिना सूचना दिए और बिना मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम (PM) कराए ही शव को चुपचाप दफना दिया। वन्यजीव प्रेमियों ने इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act, 1972) की अनुसूची-I का खुला उल्लंघन और साक्ष्य नष्ट करने का गंभीर आपराधिक कृत्य बताया है।
*क्या है पूरा मामला?*
जीव रक्षा संस्था, बीकानेर के अध्यक्ष और पूर्व मानद वन्य जीव प्रतिपालक मोखराम बिश्नोई द्वारा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), जयपुर को भेजे गए एक कड़े शिकायती पत्र के अनुसार, 14 जून 2026 (रविवार) को स्थानीय वन्यजीव प्रेमी महिलाओं ने एक स्वस्थ चिंकारा मादा को सुरक्षित उपचार के बाद मुकाम रेस्क्यू वार्ड के स्टाफ को सौंपा था। लेकिन उसी रात संदिग्ध हालात में चिंकारा की दर्दनाक मौत हो गई।
अगले दिन जब वन्यजीव प्रेमी वार्ड पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। बाद में सामने आया कि मृत चिंकारा के पेट पर गहरे घाव थे और उसके दोनों सींग टूटे हुए थे, जो किसी बड़े हमले या क्रूरता की ओर इशारा करते हैं। कानूनी प्रक्रिया को ताक पर रखकर रेंजर द्वारा शव को सीधे दफना दिया गया, जिससे विभाग की मिलीभगत पर संदेह गहरा गया है।
*आरोपी रेंजर का पुराना ‘शिकार’ रिकॉर्ड: कोर्ट में मामला लंबित*
शिकायत में नोखा रेंजर किशोर सिंह के विवादित अतीत का भी कच्चा चिट्ठा खोला गया है। दस्तावेजी सबूतों के अनुसार, 26 फरवरी 2020 को चूरू के प्रसिद्ध तालछापर अभ्यारण्य के रेस्ट हाउस (कमरा नं. 4) में रेंजर किशोर सिंह व अन्य वनकर्मियों को चिंकारा के मांस और मदिरा पार्टी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। इस मामले की विभागीय जांच में भी मांस-मदिरा की पुष्टि हुई थी और थाना छापर (चूरू) में वन्यजीव अधिनियम के तहत मुकदमा संख्या 0002/2020 दर्ज है, जो वर्तमान में सुजानगढ़ न्यायालय में विचाराधीन है। इस केस की अगली सुनवाई और गवाही 21 जुलाई 2026 को होनी है।
*आंकड़े डराने वाले: मुकाम वार्ड बना वन्यजीवों का ‘डेथ जोन’!*
वन्यजीव संस्था द्वारा जारी आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। मुकाम रेस्क्यू वार्ड में औसतन सालभर में करीब 1300 चिंकारा उपचार के लिए लाए जाते हैं, जिनमें से 1220 (लगभग 90% से अधिक) की मौत हो जाती है। पूर्व में भी यहाँ 2020 और 2021 में आवारा कुत्तों के घुसने से कई हिरणों की मौत हुई थी, जिनकी प्रशासनिक जांच रिपोर्टें आज तक दबाकर रखी गई हैं। इसके उलट, बिश्नोई समाज द्वारा संचालित निजी केंद्रों में वन्यजीवों की रिकवरी रेट 80% से ज्यादा है, जो सरकारी तंत्र की नाकामी को उजागर करता है।
*जयपुर स्तर से जांच और रेंजर को बर्खास्त करने की मांग*
जीव रक्षा संस्था ने मुख्यमंत्री, केंद्रीय वन मंत्री और मुख्य सचिव को प्रतिलिपि भेजकर निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
आरएफओ किशोर सिंह व दोषी स्टाफ को तुरंत निलंबित कर सेवा से बर्खास्त किया जाए।
साक्ष्य मिटाने और वन्यजीव अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में IPC (BNS) व WLPA के तहत नामजद मुकदमा दर्ज हो।
मुकाम रेस्क्यू वार्ड की बदहाली को देखते हुए इसे 24×7 पशु चिकित्सक, दवाओं और एम्बुलेंस युक्त “पूर्ण रेस्क्यू सेंटर” में अपग्रेड किया जाए।
जयपुर मुख्यालय के उच्चाधिकारियों की टीम भेजकर बीकानेर और कोलायत रेंज में लंबित पड़े शिकार व अतिक्रमण के मामलों की समयबद्ध निष्पक्ष जांच कराई जाए।
”*यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के खिलाफ एक संगठित प्रशासनिक अपराध है। राज्य पशु चिंकारा की सुरक्षा के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि 21 जुलाई की अदालती कार्रवाई से पहले विभाग ने दोषियों पर सख्त कदम नहीं उठाए, तो वन्यजीव प्रेमी उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।”*
— मोखराम बिश्नोई, अध्यक्ष, जीव रक्षा संस्था, बीकानेर

