वाणिज्य कर विभाग में सरकारी वाहन को लेकर विवाद, चालक को जयपुर उपस्थिति के आदेश
वाणिज्य कर विभाग में सरकारी वाहन को लेकर विवाद, चालक को जयपुर उपस्थिति के आदेश
बीकानेर में एक सरकारी बोलेरो वाहन को कन्डम (कबाड़) घोषित किए जाने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं। वाहन कन्डम होने के बाद विभाग के चालक कानाराम को जयपुर मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिससे पीड़ित चालक की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मामले के अनुसार, बीकानेर वाणिज्य कर विभाग के प्रशासन के अधिकारी समीर दान ने विभाग के लिए प्राइवेट वाहन की स्वीकृति हेतु जयपुर मुख्यालय को पत्र लिखा था।
वहीं दूसरी ओर, जयपुर मुख्यालय के अधिकारी का कहना है कि यदि बीकानेर से प्रशासनिक अधिकारी समीर दान प्राइवेट के बजाय सरकारी वाहन की मांग करते हैं, तो जयपुर से बीकानेर कार्यालय के लिए कानाराम को ही सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती ।
चालक कानाराम का आरोप है कि समीर दान से पूर्व कार्यरत अधिकारी श्री कांति लाल जी जशोल द्वारा सरकारी वाहन प्राप्त करने हेतु मुख्यालय को पत्र भेजा गया था। कानाराम ने जब इस पत्र *की प्रति विभाग के बाबू तलत महमूद* से मांगी, तो उन्हें पत्र की कॉपी देने से इंकार कर दिया ।
चालक कानाराम ने अपनी पारिवारिक व व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला देते हुए वाणिज्य कर विभाग की आयुक्त महोदया आनंदी को व्यक्तिगत सूचना दी है कि:
उनका सेवाकाल (रिटायरमेंट) अब 2 वर्ष से भी कम बचा है।
उनके कोई पुत्र नहीं है और हाल ही में उनकी पत्नी की गंभीर हार्ट सर्जरी (हृदय की शल्य चिकित्सा) हुई है। ऐसे में जयपुर उपस्थिति दर्ज कराना उनके लिए बेहद कष्टदायक है।
पूरे घटनाक्रम को देखते हुए विभागीय हलकों में भी यह चर्चा है कि प्रशासनिक *अधिकारी समीर दान को प्राइवेट वाहन की मांग करने के बजाय नियमानुसार जयपुर** मुख्यालय से सरकारी वाहन आवंटित करने के लिए पत्र लिखना चाहिए, ताकि विभाग को सरकारी गाड़ी भी मिल सके और बुजुर्ग चालक कानाराम का बीकानेर में ही रोजगार व सेवा बनी रहे।
