व्यवस्था में बदलाव कैसे हो?समय पर वेतन-सुविधाएं मिलने के बावजूद जवाबदेही का सवाल, जनता हो रही असहाय

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व्यवस्था में बदलाव कैसे हो?
समय पर वेतन-सुविधाएं मिलने के बावजूद जवाबदेही का सवाल, जनता हो रही असहाय
वासुदेव व्यास मरु समीक्षा न्यूज़ राजस्थान बीकानेर। सरकार अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन, महंगाई भत्ता, अवकाश सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। वहीं आठवें वेतन आयोग को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से भी अपने दायित्वों के प्रति पूरी ईमानदारी और जवाबदेही की अपेक्षा स्वाभाविक है।
लेकिन कई सरकारी कार्यालयों में समय पर कर्मचारियों के नहीं पहुंचने, कार्यालय समय से पहले चले जाने तथा आमजन के कार्यों में अनावश्यक देरी जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। जनता का आरोप है कि कई स्थानों पर कामकाज में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है और कुछ मामलों में रिश्वतखोरी की शिकायतें भी सामने आती हैं। यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर जनता के जायज काम के बदले अवैध राशि की मांग की जाती है, तो यह भ्रष्टाचार की गंभीर श्रेणी में आता है।
सरकारी व्यवस्था में कानून और नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों-कर्मचारियों पर है, उन्हीं पर यदि नियमों की अनदेखी या भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगें तो आमजन का व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होता है। हालांकि हर अधिकारी और कर्मचारी को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है; बड़ी संख्या में कर्मचारी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
बदलाव के लिए क्या हो सकता है?
व्यवस्था में सुधार के लिए केवल कर्मचारियों को दोषी ठहराने के बजाय जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। इसके लिए—
कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति और समयबद्ध निगरानी प्रभावी की जाए।
आमजन के काम के लिए निर्धारित समय-सीमा का सख्ती से पालन हो।
प्रत्येक आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग और जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी सार्वजनिक हो।
रिश्वत की शिकायतों पर स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो।
शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति की जानकारी दी जाए।
अधिकारियों की नियमित कार्य-प्रगति और जनसुनवाई की समीक्षा हो।
अच्छा कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन और लापरवाही करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
भ्रष्टाचार के मामलों में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि जिम्मेदारी की पूरी श्रृंखला की जांच हो।
व्यवस्था में परिवर्तन केवल आदेशों से नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने से आएगा। सरकार कर्मचारियों को अधिकार और सुविधाएं देती है तो कर्मचारियों का भी दायित्व है कि वे जनता के प्रति अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन करें।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जब आमजन अपने ही सरकारी काम के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हो, तो व्यवस्था में परिवर्तन की शुरुआत आखिर कहां से होगी? इसका जवाब केवल सरकार या अधिकारी नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और समाज को मिलकर तलाशना होगा।

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