हॉस्पिटल व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सतत औचक निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जरूरी
हॉस्पिटल व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सतत औचक निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जरूरी
बीकानेर संभाग के बड़े अस्पतालों, विशेषकर पीबीएम हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए केवल बैठकों में निर्देश देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज़मीनी स्तर पर निरंतर और प्रभावी निगरानी आवश्यक है। विशेषज्ञों व जागरूक नागरिकों का मानना है कि अस्पतालों की जिम्मेदार डॉक्टर्स टीम द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान डॉक्टर्स को सीधे मरीजों से संवाद कर यह जानना चाहिए कि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं है, दवाइयां समय पर उपलब्ध हो रही हैं या नहीं, तथा जांच आदि निर्धारित समय पर हो रही हैं या नहीं। खास तौर पर रात्रिकालीन औचक निरीक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रेजिडेंट डॉक्टर नियमित रूप से ड्यूटी दे रहे हैं और सीनियर डॉक्टर समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
साथ ही, बीकानेर के सभी जनप्रतिनिधियों को भी समय-समय पर अस्पतालों का दौरा कर व्यवस्थाओं की हकीकत जांचनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से ही स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार संभव हो सकता है।
इस दिशा में बीकानेर जिले के कैबिनेट मंत्री एवं लूणकरणसर विधायक श्री सुमित गोदारा द्वारा इस विषय पर ध्यान दिया जाना एक सराहनीय पहल मानी जा रही है। लेकिन व्यवस्था सुधार के लिए दोषी पाए जाने वाले किसी भी कर्मचारी या डॉक्टर के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है। पूर्व मामलों में जांच के बाद किसे दोषी ठहराया गया और उस पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से मीडिया को दी जानी चाहिए, ताकि स्पष्ट संदेश जाए कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि संभाग स्तरीय बड़े अस्पतालों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुचारु रखने के लिए आईएएस स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिए, जो केवल प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करे। इससे स्टाफ, ठेकेदारों और अन्य व्यवस्थाओं पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। डॉक्टर्स से प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है।
इसके अलावा संभागीय आयुक्त को भी समय-समय पर, विशेषकर रात्रि में, अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें इसके लिए स्पष्ट अधिकार दिए जाने चाहिए।
अस्पताल में भर्ती मरीज अक्सर विवश स्थिति में होता है और कई बार डर या मजबूरी के चलते वह अपनी शिकायत खुलकर नहीं कर पाता, जिससे शोषण की संभावना बढ़ जाती है। इसी कारण सख्त निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था अनिवार्य है।
अंत में, पूरे अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए और उनकी प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए। जब तक भयमुक्त लेकिन जवाबदेह व्यवस्था नहीं बनेगी, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार संभव नहीं
वासुदेव व्यास